15 February 2013

Today i started teaching. I like to learn but never thought to teach. but now i have no option hence i started teaching as well as giving training to the students. i am teaching ASP.NET,CSS,JQUERY to a student and VB.NET to group of two.

This is quite different experience than the Software Developing. I have to continuously learn and then only i can teach them. i was not too good with asp development but yes i am learning. 10+ Desktop Application and 3 Website give me experience but the more experience is waiting in teaching.

i am having knowledge of lots of thing but surface level knowledge. some of deep knowledge are as below :

  • VB.NET
  • ASP.NET
  • CORE JAVA
  • SQL DATABASE
  • CSS3
  • JQUERY

Teaching is some time good but some time bad too. Let's Hope best.

And yes i am learning many thing. and try to make them simple as possible. I will keep updating and sharing with you people.


07 January 2013

RIP HARIDUTT TRIPATHI

हर वक्त मैं सोचा करता था, जींदगी की किंमत क्या है शायद आज जान गया हुं मैं जब कि मैंने अपने प्यारे पिताजी ( हरीदत्त त्रिपाठी, ससुरजी) को खो दिया है, जींदगी बहुत अनमोल होती है यारो.. ये मुजसे बहेतर कौन जान सकता है, किस्मत वालो को मनुष्य का जन्म मिलता है और किस्मत वाले ही उसे सार्थक कर पाते है, अक्सर लोग अपने लिए जीते है, लेकिन मेरे पिताजी (ससुरजी) कुछ अलग ही प्रतिभा और सोच रखते थे, खुदसे भी ज्यादा वो लोगो की फिकर करते थे। शायद इसीलिए पीछले 2 बार से निर्विवादित निर्वाचीत प्रधान (पीछोरा गाँव, माटीनगंज, आजम़गढ, उत्तर प्रदेश) थे । और लोगोके बीच उनकी चाहना बहुत अधिक थी ।


पलभर की चाहत उनकी मेरे रुहमें बस गई,
सांसे तेज थी उनकी और जींदगी वहीं ठहर गई,
मेरे वो अपने का दम मेरे सामने टुट गया,
आज लगा खुदा मुजसे फिर रुठ गया...

कितना बदकिस्मत हुं मैं जो उनके आखरी दर्शन पास रह कर भी ना कर पाया था, घटना कुछ एसी घटी थी के मेरे पिताजी (ससुरजी) पीछले कुछ वक्त से बीमार थे, जिन्हे देखनेको मैं 5 जनवरी 2013 को साबरमती एक्सप्रेस से लखनउ गया था और पिताजी (ससुरजी) वहाँ संजय गांधी पोस्टग्रेज्युएट इन्स्टीट्यूट (पी.जी.आई.) में एडमिट थे जिन्हें मैं 7जनवरी 2013 को देखने वहाँ पहुंचा था वहाँ मैने पिताजी (ससुरजी) की हालत देखी और अपनी सुध खो बैठा था, देख कर ही बहुत बेचैन था उन्होने मुजे देखते ही पहचान लिया था, देख कर बहुत ही बेचैन था करीब 2.14 PM को जब मैं नीचे जा रहा था तभी अंजनीभईयाने दुखद समाचार दिया, मैंने और भईयाने सभी को बड़ी हिम्मत से संभाला लेकिन हमभी तो इंसान थे सदमे के मारे थे, नहीं जानता था जो हुआ वो सही था या गलत लेकिन मैं नहीं चाहता था कि एसा कुछ हो, मैं क्या कोई भी नहीं चाहता था की कोई अनहोनी हो, लेकिन एक बार फिर खुदाने दुवाओं को ठुकरा दिया, और पिताजी (ससुरजी) के हजारो सपने अधुरे रख छीन लिया हमसे,

30 November 2012

My Engagement

कैसे है दोस्तो,
इस 30 नवंम्बर, 2012 के दिन मेरी सगाई सपना हरिदत्त त्रिपाठी से संपन्न हुई,
बहोत ही बहेतरीन और यादगार दिन था ये जो हर पल मेरे जहेन में रहेगा, शायद हम बने ही एक दुजे के लिए थे, क्या सुहाना दिन था और उस से भी बहेतरीन वो शाम थी......


मेरे हिस्से की चांदनी समुंदर में गल गई,
वो क्या आई पुरानी हर याद जल गई,
एक अर्से से था उनके दीदार का इंतेजार,
कमबख्त वो शाम आई और ढल गई...

समा-ए-शबनम का किनारा हम क्या कहते
किसी मुसाफिर का सहारा हम क्या कहेते,
जब से देखा है वो नूर तेरी आँखोंमें सन्नोरानी,
चांदनी चांद की बेनूर है ये क्यो ना कहेते,
तेरी नजरो से जो कत्ल हुआ है हसीना
बचाले ये बात खुदासे हम भी क्या कहेते....